दूसरों की राय क्यों हमारी पहचान बन जाती है और इससे कैसे मुक्त हों

क्या आपने कभी कोई काम सिर्फ इसलिए छोड़ा क्योंकि किसी ने कहा यह तुम्हारे लिए नहीं है? या कोई सपना सिर्फ इसलिए दफन किया क्योंकि समाज ने उसे व्यर्थ बताया? हम जाने-अनजाने दूसरों की आँखों से खुद को देखने लगते हैं। जब यही दृष्टि हमारी पहचान बन जाती है तब हम वह नहीं जी पाते जो हम वास्तव में हैं। इस बात में हम खोजेंगे वह मार्ग जो हमें दूसरों की राय की कैद से आज़ाद करे।
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Tippanis (5)

Dilip_5183 1,471 ✨ 7 mahine pehle
मेरे पड़ोसी हमेशा मेरे बारे में कुछ न कुछ कहते रहते हैं। पता है कि उनकी राय से फर्क नहीं पड़ना चाहिए पर पड़ता है। क्यों?
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Manju_8647 10,526 ✨ 7 mahine pehle Jawab
क्योंकि हम सामाजिक प्राणी हैं और दूसरों की स्वीकृति हमारे मन को ज़रूरी लगती है। पर यह ज़रूरत असीमित नहीं होनी चाहिए।
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Pramod_3291 8,423 ✨ 7 mahine pehle Jawab
इसका एक उपाय यह है — अपने लिए ऐसे लोगों का एक छोटा समूह बनाएं जिनकी राय आपके लिए सच में महत्वपूर्ण हो। बाकी की चिंता छोड़ें।
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Sheela_6748 5,467 ✨ 7 mahine pehle
क्या वे लोग जो दूसरों की राय की परवाह नहीं करते वे अहंकारी होते हैं?
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Rajiv_4194 11,619 ✨ 7 mahine pehle Jawab
नहीं। अहंकार यह है कि आप दूसरों को गलत मानें। दूसरों की राय से स्वतंत्र होना यह है कि आप अपना मार्ग खुद चुनें।
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Pushpa_8361 16,251 ✨ 7 mahine pehle Jawab
जो खुद पर भरोसा करते हैं वे दूसरों की राय सुनते हैं पर उससे परिभाषित नहीं होते। यह बड़ा फर्क है।
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Vinod_5827 877 ✨ 7 mahine pehle
मैंने अपनी पसंद का काम शुरू किया तो परिवार ने कहा यह बेकार है। अब मन में संशय है। क्या करूँ?
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Nandini_3695 10,182 ✨ 7 mahine pehle Jawab
परिवार की चिंता प्यार से आती है पर हर बार वे सही नहीं होते। अपने काम को वक्त दें और नतीजे आने दें।
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Ashok_7148 17,134 ✨ 7 mahine pehle Jawab
जिन्होंने अपना रास्ता बनाया उनके परिवार ने भी शुरू में उनके सपने नहीं समझे। पर उन्होंने काम नहीं छोड़ा।
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Savita_4362 13,319 ✨ 7 mahine pehle
मैं बहुत संवेदनशील हूँ। छोटी-सी आलोचना भी मुझे बहुत प्रभावित करती है। क्या इसे बदला जा सकता है?
785 💬 2 Jawab
Sudhir_8193 2,365 ✨ 7 mahine pehle Jawab
संवेदनशीलता एक शक्ति है। बस इसे सही जगह लगाएं। आलोचना में जो सच है उसे लें बाकी छोड़ दें।
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Lalita_6847 15,530 ✨ 7 mahine pehle Jawab
हर आलोचना सच नहीं होती। जो आलोचना आपको बेहतर बनाए वह रखें जो सिर्फ तोड़ने के लिए हो उसे जाने दें।
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Manoj_3917 8,436 ✨ 7 mahine pehle
सामाजिक माध्यमों पर हर बात पर लोग राय देते हैं। इस दौर में दूसरों की राय से मुक्त होना और भी मुश्किल लगता है।
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Indira_7284 2,907 ✨ 7 mahine pehle Jawab
इसीलिए अपने मन का एक ऐसा कमरा बनाना ज़रूरी है जहाँ बाहर की आवाज़ें नहीं पहुँचतीं। वह कमरा है — आपकी अपनी मूल्य दृष्टि।
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Ramkumar_5164 7,150 ✨ 7 mahine pehle Jawab
सामाजिक माध्यमों से कुछ समय की दूरी लेना और खुद से जुड़ना — यह आज के दौर की सबसे ज़रूरी आदत है।
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