बचपन की कड़वी बातें कैसे हमारे आत्मविश्वास को जड़ से तोड़ देती हैं
जब हम बच्चे थे तब किसी ने शायद कहा हो कि तुमसे यह नहीं होगा या तुम दूसरों जैसे क्यों नहीं हो। उस समय हम उन शब्दों का असर नहीं जानते थे पर वे मन की गहराई में उतर जाते हैं। धीरे-धीरे ये बातें हमारी सोच का हिस्सा बन जाती हैं और हम खुद भी खुद से वही कहने लगते हैं। यह समझना ज़रूरी है कि बचपन के ये ज़ख्म कैसे हमारे आज को प्रभावित करते हैं। इस बात में हम देखेंगे कि इन पुरानी परछाइयों से कैसे मुक्त हों।
❤
10,636 Pasand
👎
468 Napasand
💬
5 Tippanis