रिश्तों में विश्वास टूट जाए तो क्या करें — माफ करना है या उस रिश्ते को छोड़ना
विश्वास रिश्तों की नींव है और जब वह टूटती है तो पूरी इमारत हिल जाती है। माफ करना एक बड़ी शक्ति है लेकिन माफ करने का मतलब हर बार वही गलती फिर सहना नहीं होता। कुछ रिश्ते टूटे विश्वास के बाद भी नई नींव पर खड़े हो सकते हैं — लेकिन इसके लिए दोनों तरफ से ईमानदार प्रयास चाहिए। जब केवल एक तरफ से कोशिश हो तो वह रिश्ता नहीं बोझ बन जाता है।
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